क्या हुआ जो आज तुम हारे हो तो क्या हुआ??
फैल ही तो हुए हो कोन सी कोई जंग हार गए हो जिंदगी मै कोई भी ऐसा
व्यक्ति आपको नही मिलेगा जो कहेगा कि मैं फैल ही नही हुआ। कोई छोटे स्तर पे तो कोई बड़े स्तर पर भिन्न -भिन्न चीजो मैं परास्त जरूर हुआ होगा। और हमें हमारे फेलियर से ही तो सीखने को मिलता है इसके लिए suicide करना मूर्खता है । अगर ज़िन्दगी मैं संघर्ष नही है तो ज़िन्दगी थोड़ी नीरस सी है । चलिए मैं एक कहानी के माध्यम से अवगत कराती हु की किस प्रकार आप सभी की तरह रमेश भी वही कदम उठाने जा रहा था जोकि आज का विद्यार्थी उठाता है(ये कहानी मेरे द्वारा रचित है तथा ये बिल्कुल काल्पनिकता पर आधारित है)!
रमेश (12 कक्षा का विद्यार्थी है) परीक्षा खत्म हुए अभी दो ही दिन हुए थे कि रमेश को परीक्षा मैं फैल होने का भय सता रहा था जैसे जैसे परीक्षा की तिथि पास आ रही थी वैसे वैसे रमेश का डर अब एक आकर लेने लगा था ।यही कारण था कि वो नाही खाना ठीक से खा पा रहा था न ही सो पा रहा था ।डर तो इतना था कि वह अपने माता पिता से भी यह कहने मे डर रहा था कि उसकी परीक्षा खराब गयी धीरे धीरे परीक्षा की तीस तारीख़ भी सामने आके खडी हो गयी ।और रमेश का हौसला पहले से ही डग मगा रहा था और इस कारण वह ऐसा कदम उठाने जा रहा था जो हर नोजवान ऐसी सिथति मैं उठाता है उसके हाथ पैर काप रहे थे अपने आप के लिए फंदा बनाते हुए उसके मन मे कई विचार चल रहे थे ।इस जिंदगी मैं आने का लक्ष्य क्या था और मेरे बाद मम्मी और पापा का क्या होगा और भैया तो हर वक्त मेरी चिंता मैं लगे रहते है ।कल ही तो उनका फ़ोन आया था।और फ़ोन उठाते ही उन्होंने सबसे पहले मेरे बारे मे ही तो पूछा था। उन्होंने कहा था छोटे इस बार तुम्हारा भी एडमिशन अपने ही कॉलेज मैं करवाएंगे बस तुम अच्छे अच्छे नम्बर से पास हो जाओ उन संवादों मैं कितनी खुशी झलक रही थी रमेश रोज की तरह आज भी डायरी लिख रहा था मगर आज लिखने की वजह शायद एक वजह ही बन कर रह जाये लिखते समय उसके दिमाग मे वो सभी पुरानी यादे ताजा हो रही थी और वो उन यादो मैं खोने लगा था । वो छोटी मोटी शरारतें भैया का काम खराब करके मम्मी के पीछे छुप जाना और पूछने पर सब कुछ सच बता देना कितने प्यारे दिन थे अचानक से वह उन गहरहियो की खाईयो मैं से निकलने की कोशिश करता है अब उसके सामने वह और उसका फंदा है वह पंखे से उस फन्दे को बांध चुका था।तभी ही बाहर किसी के आने की आहट हुई वह मन ही मन सोचने लगा कि पापा तो office गए है और आज तो मां भी घर पे नही हैं और भैया तो होस्टल मैं रहते है तो फिर? 🤔 ... वह खिड़की से झाँकता है तो उसे पता चलता है कि ये तो प्रफुल्ल भइया है जोकि मां के साथ थे ।प्रफुल्ल आते ही छोटे को आवज़ देने लगे। छोटे के न पहुचने पर वह खुद ही मेरे कमरे मे आ गए और मैं उस दौरान सभी चीजों को छुपाने मैं लग गया था जिनसे उनको कुछ भी पता न चले कि अभी मैं क्या करने जा रहा था भैया ने जैसे ही किवाड़ खोला वैसे ही उनकी नज़र पंखे पर गयी और दूसरी नजर मुझ पर गयी .. वह सब कुछ भाँप चुके थे वो कुछ बोलते इससे पहले ही उनकी आंखें बोलने लगी कि ये कया करने जा रहे थे ।।भैया मेरे पास आये और मुझे रोते हुए गले लगाया और उनक गले लगाते ही छोटा भी सुबकने लगा । छोटे क्या ज़िन्दगी की कीमत इतनी सस्ती है कि तू मौत को गले लगाने जा रहा था ।कभी सोचा कि तेरे जाने के बाद हमारा क्या होता... छोटे जिंदगी मैं फेलियर मेरी ज़िंदगी मे भी आया मग़र मैने कदम उठाया न कि मरने के लिए बल्कि उसी ऊर्जा के साथ दुबारा अपने मिशन पे लगने के लिए👮भैया मैं आपसे मैं वादा करता हु की मैं आज के बाद ऐसा कभी कोई कदम नही उठाऊंगा ।।।।👆
🏻क्या हुआ जो आज हारे हो
क्या हुआ जो कल भी हारोगे
हा क्या हुआ फैल ही तो हुए हो फिर उठो और उसी फुर्ती के साथ अपना कर्म करो🙂।
धन्यवाद...
व्यक्ति आपको नही मिलेगा जो कहेगा कि मैं फैल ही नही हुआ। कोई छोटे स्तर पे तो कोई बड़े स्तर पर भिन्न -भिन्न चीजो मैं परास्त जरूर हुआ होगा। और हमें हमारे फेलियर से ही तो सीखने को मिलता है इसके लिए suicide करना मूर्खता है । अगर ज़िन्दगी मैं संघर्ष नही है तो ज़िन्दगी थोड़ी नीरस सी है । चलिए मैं एक कहानी के माध्यम से अवगत कराती हु की किस प्रकार आप सभी की तरह रमेश भी वही कदम उठाने जा रहा था जोकि आज का विद्यार्थी उठाता है(ये कहानी मेरे द्वारा रचित है तथा ये बिल्कुल काल्पनिकता पर आधारित है)!
रमेश (12 कक्षा का विद्यार्थी है) परीक्षा खत्म हुए अभी दो ही दिन हुए थे कि रमेश को परीक्षा मैं फैल होने का भय सता रहा था जैसे जैसे परीक्षा की तिथि पास आ रही थी वैसे वैसे रमेश का डर अब एक आकर लेने लगा था ।यही कारण था कि वो नाही खाना ठीक से खा पा रहा था न ही सो पा रहा था ।डर तो इतना था कि वह अपने माता पिता से भी यह कहने मे डर रहा था कि उसकी परीक्षा खराब गयी धीरे धीरे परीक्षा की तीस तारीख़ भी सामने आके खडी हो गयी ।और रमेश का हौसला पहले से ही डग मगा रहा था और इस कारण वह ऐसा कदम उठाने जा रहा था जो हर नोजवान ऐसी सिथति मैं उठाता है उसके हाथ पैर काप रहे थे अपने आप के लिए फंदा बनाते हुए उसके मन मे कई विचार चल रहे थे ।इस जिंदगी मैं आने का लक्ष्य क्या था और मेरे बाद मम्मी और पापा का क्या होगा और भैया तो हर वक्त मेरी चिंता मैं लगे रहते है ।कल ही तो उनका फ़ोन आया था।और फ़ोन उठाते ही उन्होंने सबसे पहले मेरे बारे मे ही तो पूछा था। उन्होंने कहा था छोटे इस बार तुम्हारा भी एडमिशन अपने ही कॉलेज मैं करवाएंगे बस तुम अच्छे अच्छे नम्बर से पास हो जाओ उन संवादों मैं कितनी खुशी झलक रही थी रमेश रोज की तरह आज भी डायरी लिख रहा था मगर आज लिखने की वजह शायद एक वजह ही बन कर रह जाये लिखते समय उसके दिमाग मे वो सभी पुरानी यादे ताजा हो रही थी और वो उन यादो मैं खोने लगा था । वो छोटी मोटी शरारतें भैया का काम खराब करके मम्मी के पीछे छुप जाना और पूछने पर सब कुछ सच बता देना कितने प्यारे दिन थे अचानक से वह उन गहरहियो की खाईयो मैं से निकलने की कोशिश करता है अब उसके सामने वह और उसका फंदा है वह पंखे से उस फन्दे को बांध चुका था।तभी ही बाहर किसी के आने की आहट हुई वह मन ही मन सोचने लगा कि पापा तो office गए है और आज तो मां भी घर पे नही हैं और भैया तो होस्टल मैं रहते है तो फिर? 🤔 ... वह खिड़की से झाँकता है तो उसे पता चलता है कि ये तो प्रफुल्ल भइया है जोकि मां के साथ थे ।प्रफुल्ल आते ही छोटे को आवज़ देने लगे। छोटे के न पहुचने पर वह खुद ही मेरे कमरे मे आ गए और मैं उस दौरान सभी चीजों को छुपाने मैं लग गया था जिनसे उनको कुछ भी पता न चले कि अभी मैं क्या करने जा रहा था भैया ने जैसे ही किवाड़ खोला वैसे ही उनकी नज़र पंखे पर गयी और दूसरी नजर मुझ पर गयी .. वह सब कुछ भाँप चुके थे वो कुछ बोलते इससे पहले ही उनकी आंखें बोलने लगी कि ये कया करने जा रहे थे ।।भैया मेरे पास आये और मुझे रोते हुए गले लगाया और उनक गले लगाते ही छोटा भी सुबकने लगा । छोटे क्या ज़िन्दगी की कीमत इतनी सस्ती है कि तू मौत को गले लगाने जा रहा था ।कभी सोचा कि तेरे जाने के बाद हमारा क्या होता... छोटे जिंदगी मैं फेलियर मेरी ज़िंदगी मे भी आया मग़र मैने कदम उठाया न कि मरने के लिए बल्कि उसी ऊर्जा के साथ दुबारा अपने मिशन पे लगने के लिए👮भैया मैं आपसे मैं वादा करता हु की मैं आज के बाद ऐसा कभी कोई कदम नही उठाऊंगा ।।।।👆
🏻क्या हुआ जो आज हारे हो
क्या हुआ जो कल भी हारोगे
हा क्या हुआ फैल ही तो हुए हो फिर उठो और उसी फुर्ती के साथ अपना कर्म करो🙂।
धन्यवाद...
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