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Showing posts from October, 2018
             मेरी दृष्टि से मेरी जिंदगी आज बाबूजी की पुण्य तिथि है और यह तिथि हमारे लिए विशेष तीन साल पहले बनी थी पिताजी की उम्र 50 वर्ष के आस पास रही होगी उस वक़्त मैं 13 का साल का रहा होऊंगा पिताजी कारखाने मै काम करते थे माँ बताया करती है कि मेरे पिताजी के पिताजी यानी कि मेरे दादा भी उसी मैं काम किया करते थे ।पिताजी को एक बहुत ही बुरी लत थी शराब पीने की और वे अपने अंतिम समय मैं भी शराब के नशे मैं सराबोर थे।मैंने जब भी पिताजी को सुना उनके मुह से सिर्फ गालियां ही निकली ।या गालियों के सहारे निकली बाते ।मेरे स्मृति पटल पर एक ही रील बार -बार दौड़ा करती जैसे कि पारिवारिक क्लेश ।बता देना चाहूंगा की मुझसे दो साल बडा मेरा एक भाई भी है और एक साल छोटी बहन ।वैसे तो गृह क्लेश हमारे वातावरण मैं अपनी पैठ बनाए रखता था किंतु मैं और मेरी छोटी बहन की इस पर प्रतिक्रिया यही रहती की...हम रोने के अलावा कुछ नही कर सकते थे बडा भाई समझाता की अपने दिल को पक्का कर लो क्यूंकि ये क्लेश नही शांत होना.. इस परिवेश मैं रहके मैने मेरी बी ए की पढ़ाई की...सच क...

90 के दौर का प्रेम

के जब हमे खो दोगे यक़ीन है मुझे तभी रो दोगे रो दोगे की कितना रोने को मजबूर किया की जितना मैंने इस संसार को जाना था उस भ्रम को तोड़ दिया के जब हमें ..... दूर से बुलावा आता नही ,मन भी मेरा मरने को चाहता नही,, पर जो बन्द कर दिए मेरे लिए द्वार तो हार के,मन को मार के चलते है।। सोचूंगी की मेरे नसिब मै ना माँ की ममता थी , ना पिता का सर पे हाथ।। मेरे दिल और दिमाग के बीच एक जंग छिड़ी थी, दिमाग कहता हैं कि कोई अपना नही और दिल हर एक शख्स मै प्यार खोजा करता है कहता है इस अमुक व्यक्ति के लिए रुक जा, कोई कदम न उठा , थम जा की अभी सवेरा होने दे।।

के जब हमें खो देंगे(कविता)!

के जब हमे खो दोगे यक़ीन है मुझे तभी रो दोगे रो दोगे की कितना रोने को मजबूर किया की जितना मैंने इस संसार को जाना था उस भ्रम को तोड़ दिया के जब हमें ..... दूर से बुलावा आता नही ,मन भी मेरा मरने को चाहता नही,, पर जो बन्द कर दिए मेरे लिए द्वार तो हार के,मन को मार के चलते है।। सोचूंगी की मेरे नसिब मै ना माँ की ममता थी , ना पिता का सर पे हाथ।। मेरे दिल और दिमाग के बीच एक जंग छिड़ी थी, दिमाग कहता हैं कि कोई अपना नही और दिल हर एक शख्स मै प्यार खोजा करता है कहता है इस अमुक व्यक्ति के लिए रुक जा, कोई कदम न उठा , थम जा की अभी सवेरा होने दे।।

उस गली आना भूल गए

के.. भूल चुके जो इस कदर के.. अब  नाम का अक्षर पता नही के ..जो कल तक करते थे बाते हिन्दी मे वो इंग्लिश का मतलब समझ गए के ..परिचित सी मुस्कान छुपाके दिल का रस्ता बेध गए के ..मृग नयन से नैन बंधाकर उस गली से आना भूल गए के.. शाम हुआ करती थी उसकी बस्ती मैं के ..राते भी कटती थी उसकी कश्ती मैं और वो जहर पिलाना भूल गए के.. बात जो निकली थी मुह से वो नजर से कहना भूल गए के..दुआ सलाम अब नही रहा बाकी वो किनारे तक लाके छोड़ गए के..रहते थे हम जिस नशे मैं वो वाली बोतल चढ़ाना भूल गए के ..लबो से निकले शब्द थे कम वो इन्ही शब्दो से काम चलाना सिख गए के ..अपनी मीठी वाणी से वो झूठ का जाम बनाना सिख गए के.. मेरे जैसे आशिको को वो पागल बनाना सीख गए।। लीना

के जैसे तू गया है (कविता)

भीगी आंखों से आरजू है मेरी की इस रास्ते कभी नही आइयो और मेरी सुखी आंखों को अपना घर न बनाईयो जहा भी जाइयो किसी को न रुलाइयौ गर्मी के दिनों मैं भी सर्द रात हो जाइयो मगर इस कदर कोई तुझे चाहे ऐसा दर्जा उसे न दियाइयो वो तीखी नजरो का उसकी आँखों मे बयान न दर्ज कर्रवाइयों के मुझ जैसा भी कोई तड़पा है ऐसा इश्तिहार मत छपवाईयो के जैसे तू गया है , वैसे अब वापस मत आइयो जो सुनके भी तू सुन न सका अब उसमें तू अपना दिमाग मत लगाइयो के जैसे तू गया है वैसे अब वापस मत आइयो के किसी धड़कते हुए दिल को बंजर न कर जाइयो के हँस भी ना पाऊ ऐसी मोहर न छोड़ जाइयो के जैसे तू गया है वैसे अब वापस मत आइयो इस पिघले दिल को पत्थर बनालूँगा ऐसा एक जुमला छोड़ जाइयो राहो मैं दिखूं तुझे कहि तो अपना परिचित नही बताइयो के जैसे तू गया है वैसे अब वापस मत आइयो लीना