के जैसे तू गया है (कविता)

भीगी आंखों से आरजू है मेरी
की इस रास्ते कभी नही आइयो
और मेरी सुखी आंखों को अपना घर
न बनाईयो
जहा भी जाइयो किसी को न रुलाइयौ
गर्मी के दिनों मैं भी सर्द रात हो जाइयो
मगर इस कदर कोई तुझे चाहे
ऐसा दर्जा उसे न दियाइयो
वो तीखी नजरो का उसकी आँखों मे
बयान न दर्ज कर्रवाइयों
के मुझ जैसा भी कोई तड़पा है
ऐसा इश्तिहार मत छपवाईयो
के जैसे तू गया है ,
वैसे अब वापस मत आइयो
जो सुनके भी तू सुन न सका
अब उसमें तू अपना दिमाग मत लगाइयो
के जैसे तू गया है
वैसे अब वापस मत आइयो
के किसी धड़कते हुए दिल को
बंजर न कर जाइयो
के हँस भी ना पाऊ
ऐसी मोहर न छोड़ जाइयो
के जैसे तू गया है
वैसे अब वापस मत आइयो
इस पिघले दिल को पत्थर बनालूँगा
ऐसा एक जुमला छोड़ जाइयो
राहो मैं दिखूं तुझे कहि
तो अपना परिचित नही बताइयो
के जैसे तू गया है
वैसे अब वापस मत आइयो
लीना




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