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Showing posts from 2018

रूठोगे तो मना लेंगे ...कविता...

रूठोगे मना लेंगे कोई बात नही दूरी बढ़ेगी तो पास बुलालेंगे कोई बात नही उदासी होगी जो इन लबो पे एक जाम हँसी का चूरा लेंगे...कोई बात नही कभी शब्द कम पड़े प्यार बताने मैं...तो इजाद कर लेंगे नये शब्द तो कोई बात नही... जब पकड़ के दामन तेरा हाथो मैं ..तुम हाथ छुड़ा लोगे तो..  कोई बात नही मिलना ना होगा अब ये कह के आंसू टपका लेंगे ...तो कोई बात नही के जाते जाते तन्हा कर दोगे इस दामन को आँसुओ से भर दोगे... तो कोई बात नही!! के दिल को तसली दे लूंगा..थोड़ा इल्जाम वक्त को दे दूंगा तो कोई बात नही.. मंजिल दोनो की अलग है...कहके दूरी बढ़ा लोगे तो कोई बात नही.. .....लीना....
             मेरी दृष्टि से मेरी जिंदगी आज बाबूजी की पुण्य तिथि है और यह तिथि हमारे लिए विशेष तीन साल पहले बनी थी पिताजी की उम्र 50 वर्ष के आस पास रही होगी उस वक़्त मैं 13 का साल का रहा होऊंगा पिताजी कारखाने मै काम करते थे माँ बताया करती है कि मेरे पिताजी के पिताजी यानी कि मेरे दादा भी उसी मैं काम किया करते थे ।पिताजी को एक बहुत ही बुरी लत थी शराब पीने की और वे अपने अंतिम समय मैं भी शराब के नशे मैं सराबोर थे।मैंने जब भी पिताजी को सुना उनके मुह से सिर्फ गालियां ही निकली ।या गालियों के सहारे निकली बाते ।मेरे स्मृति पटल पर एक ही रील बार -बार दौड़ा करती जैसे कि पारिवारिक क्लेश ।बता देना चाहूंगा की मुझसे दो साल बडा मेरा एक भाई भी है और एक साल छोटी बहन ।वैसे तो गृह क्लेश हमारे वातावरण मैं अपनी पैठ बनाए रखता था किंतु मैं और मेरी छोटी बहन की इस पर प्रतिक्रिया यही रहती की...हम रोने के अलावा कुछ नही कर सकते थे बडा भाई समझाता की अपने दिल को पक्का कर लो क्यूंकि ये क्लेश नही शांत होना.. इस परिवेश मैं रहके मैने मेरी बी ए की पढ़ाई की...सच क...

90 के दौर का प्रेम

के जब हमे खो दोगे यक़ीन है मुझे तभी रो दोगे रो दोगे की कितना रोने को मजबूर किया की जितना मैंने इस संसार को जाना था उस भ्रम को तोड़ दिया के जब हमें ..... दूर से बुलावा आता नही ,मन भी मेरा मरने को चाहता नही,, पर जो बन्द कर दिए मेरे लिए द्वार तो हार के,मन को मार के चलते है।। सोचूंगी की मेरे नसिब मै ना माँ की ममता थी , ना पिता का सर पे हाथ।। मेरे दिल और दिमाग के बीच एक जंग छिड़ी थी, दिमाग कहता हैं कि कोई अपना नही और दिल हर एक शख्स मै प्यार खोजा करता है कहता है इस अमुक व्यक्ति के लिए रुक जा, कोई कदम न उठा , थम जा की अभी सवेरा होने दे।।

के जब हमें खो देंगे(कविता)!

के जब हमे खो दोगे यक़ीन है मुझे तभी रो दोगे रो दोगे की कितना रोने को मजबूर किया की जितना मैंने इस संसार को जाना था उस भ्रम को तोड़ दिया के जब हमें ..... दूर से बुलावा आता नही ,मन भी मेरा मरने को चाहता नही,, पर जो बन्द कर दिए मेरे लिए द्वार तो हार के,मन को मार के चलते है।। सोचूंगी की मेरे नसिब मै ना माँ की ममता थी , ना पिता का सर पे हाथ।। मेरे दिल और दिमाग के बीच एक जंग छिड़ी थी, दिमाग कहता हैं कि कोई अपना नही और दिल हर एक शख्स मै प्यार खोजा करता है कहता है इस अमुक व्यक्ति के लिए रुक जा, कोई कदम न उठा , थम जा की अभी सवेरा होने दे।।

उस गली आना भूल गए

के.. भूल चुके जो इस कदर के.. अब  नाम का अक्षर पता नही के ..जो कल तक करते थे बाते हिन्दी मे वो इंग्लिश का मतलब समझ गए के ..परिचित सी मुस्कान छुपाके दिल का रस्ता बेध गए के ..मृग नयन से नैन बंधाकर उस गली से आना भूल गए के.. शाम हुआ करती थी उसकी बस्ती मैं के ..राते भी कटती थी उसकी कश्ती मैं और वो जहर पिलाना भूल गए के.. बात जो निकली थी मुह से वो नजर से कहना भूल गए के..दुआ सलाम अब नही रहा बाकी वो किनारे तक लाके छोड़ गए के..रहते थे हम जिस नशे मैं वो वाली बोतल चढ़ाना भूल गए के ..लबो से निकले शब्द थे कम वो इन्ही शब्दो से काम चलाना सिख गए के ..अपनी मीठी वाणी से वो झूठ का जाम बनाना सिख गए के.. मेरे जैसे आशिको को वो पागल बनाना सीख गए।। लीना

के जैसे तू गया है (कविता)

भीगी आंखों से आरजू है मेरी की इस रास्ते कभी नही आइयो और मेरी सुखी आंखों को अपना घर न बनाईयो जहा भी जाइयो किसी को न रुलाइयौ गर्मी के दिनों मैं भी सर्द रात हो जाइयो मगर इस कदर कोई तुझे चाहे ऐसा दर्जा उसे न दियाइयो वो तीखी नजरो का उसकी आँखों मे बयान न दर्ज कर्रवाइयों के मुझ जैसा भी कोई तड़पा है ऐसा इश्तिहार मत छपवाईयो के जैसे तू गया है , वैसे अब वापस मत आइयो जो सुनके भी तू सुन न सका अब उसमें तू अपना दिमाग मत लगाइयो के जैसे तू गया है वैसे अब वापस मत आइयो के किसी धड़कते हुए दिल को बंजर न कर जाइयो के हँस भी ना पाऊ ऐसी मोहर न छोड़ जाइयो के जैसे तू गया है वैसे अब वापस मत आइयो इस पिघले दिल को पत्थर बनालूँगा ऐसा एक जुमला छोड़ जाइयो राहो मैं दिखूं तुझे कहि तो अपना परिचित नही बताइयो के जैसे तू गया है वैसे अब वापस मत आइयो लीना

इंटरनेट का प्रभाव विद्यार्थी के जीवन मे!

1 GB DATA आज का दौर इंटरनेट का दौर है कितने काम है जोकि चुटकी बजाते ही पूरे हो जाते है  जैसे बिजली का बिल घर बैठे भरा जा सकता है ,ऑनलाइन शॉपिंग कर सकते है ! हा हा मुजे पता है कि ये सभी इंटरनेट के फायदे हैं मगर इस इंटरनेट का दुष्परिणाम हमारे कहानी के मुख्य पात्र मयंक पेर पड़ रहे थे वह अभी सिर्फ 10 वी कक्षा मैं पड़ता है और इस साल उसकी बोर्ड की परीक्षा है किंतु वह अपनी परीक्षा के प्रति बिल्कुल भी सजग नही है ।उसकी सुबह शुरू होती है फोन से और खत्म भी उसी पर होती है स्कूल जाने के अलावा वह कभी भी सेल्फ स्टडी नही करता है।वह फ़ोन का आदि हो चुका है ,या तो उसे हर 5मिनट मैं सोशल मीडिया पर कुछ न कुछ uplode करनी होती है या फिर या कोई फनी वीडियो डाऊनलोड और उसकी यही दिनचर्या बन चुकी है।अभी कल इसी कारण उसे eye चेककप कराने के लिए जाना पड़ा।.... पहले के समय मैं हर विद्यार्थी का कोई न कोई लक्ष्य होता था किंतु मयंक का रोज का लक्ष्य है 1 GB DATA  खत्म करना ।। और उस 1 gb डाटा खत्म करने के चक्कर मे उसका कितना नुकसान हो रहा है ये शायद उसे पता नही ! मानती हूं कि इंटरनेट का आना समाज मे एक क्रांति के सम...

क्या हुआ जो आज तुम हारे हो तो क्या हुआ??

फैल ही तो हुए हो कोन सी कोई जंग हार गए हो जिंदगी मै कोई भी ऐसा व्यक्ति आपको नही मिलेगा जो कहेगा कि मैं फैल ही नही हुआ। कोई छोटे स्तर पे तो कोई बड़े स्तर पर भिन्न -भिन्न चीजो मैं परास्त जरूर हुआ होगा। और हमें हमारे फेलियर से ही तो सीखने को मिलता है इसके लिए suicide करना मूर्खता है । अगर ज़िन्दगी मैं संघर्ष नही है तो ज़िन्दगी थोड़ी नीरस सी है । चलिए मैं एक कहानी के माध्यम से अवगत कराती हु की किस प्रकार आप सभी की तरह रमेश भी वही कदम उठाने जा रहा था जोकि आज का विद्यार्थी उठाता है(ये कहानी मेरे द्वारा रचित है तथा ये बिल्कुल काल्पनिकता पर आधारित है)! रमेश (12 कक्षा का विद्यार्थी है) परीक्षा खत्म हुए अभी दो ही दिन हुए थे कि रमेश को परीक्षा मैं फैल होने का भय सता रहा था जैसे जैसे परीक्षा की तिथि पास आ रही थी वैसे वैसे रमेश का डर अब एक आकर लेने लगा था ।यही कारण था कि वो नाही खाना ठीक से खा पा रहा था न ही सो पा रहा था ।डर तो इतना था कि वह अपने माता पिता से भी यह कहने मे डर रहा था कि उसकी परीक्षा खराब गयी धीरे धीरे परीक्षा की तीस तारीख़ भी सामने आके खडी हो गयी ।और रमेश का हौसला पहले से ही डग मगा रह...