उस गली आना भूल गए
के.. भूल चुके जो इस कदर
के.. अब नाम का अक्षर पता नही
के ..जो कल तक करते थे बाते हिन्दी मे
वो इंग्लिश का मतलब समझ गए
के ..परिचित सी मुस्कान छुपाके
दिल का रस्ता बेध गए
के ..मृग नयन से नैन बंधाकर
उस गली से आना भूल गए
के.. शाम हुआ करती थी उसकी बस्ती मैं
के ..राते भी कटती थी उसकी कश्ती मैं
और वो जहर पिलाना भूल गए
के.. बात जो निकली थी मुह से
वो नजर से कहना भूल गए
के..दुआ सलाम अब नही रहा बाकी
वो किनारे तक लाके छोड़ गए
के..रहते थे हम जिस नशे मैं
वो वाली बोतल चढ़ाना भूल गए
के ..लबो से निकले शब्द थे कम
वो इन्ही शब्दो से काम चलाना सिख गए
के ..अपनी मीठी वाणी से
वो झूठ का जाम बनाना सिख गए
के.. मेरे जैसे आशिको को
वो पागल बनाना सीख गए।।
लीनाके.. अब नाम का अक्षर पता नही
के ..जो कल तक करते थे बाते हिन्दी मे
वो इंग्लिश का मतलब समझ गए
के ..परिचित सी मुस्कान छुपाके
दिल का रस्ता बेध गए
के ..मृग नयन से नैन बंधाकर
उस गली से आना भूल गए
के.. शाम हुआ करती थी उसकी बस्ती मैं
के ..राते भी कटती थी उसकी कश्ती मैं
और वो जहर पिलाना भूल गए
के.. बात जो निकली थी मुह से
वो नजर से कहना भूल गए
के..दुआ सलाम अब नही रहा बाकी
वो किनारे तक लाके छोड़ गए
के..रहते थे हम जिस नशे मैं
वो वाली बोतल चढ़ाना भूल गए
के ..लबो से निकले शब्द थे कम
वो इन्ही शब्दो से काम चलाना सिख गए
के ..अपनी मीठी वाणी से
वो झूठ का जाम बनाना सिख गए
के.. मेरे जैसे आशिको को
वो पागल बनाना सीख गए।।
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