के जब हमें खो देंगे(कविता)!


के जब हमे खो दोगे

यक़ीन है मुझे तभी रो दोगे

रो दोगे की कितना रोने को मजबूर किया

की जितना मैंने इस संसार को जाना था

उस भ्रम को तोड़ दिया

के जब हमें .....

दूर से बुलावा आता नही ,मन भी मेरा

मरने को चाहता नही,,

पर जो बन्द कर दिए मेरे लिए द्वार

तो हार के,मन को मार के

चलते है।।

सोचूंगी की मेरे नसिब मै

ना माँ की ममता थी , ना पिता का सर पे

हाथ।।

मेरे दिल और दिमाग के बीच एक जंग छिड़ी थी, दिमाग कहता हैं कि कोई अपना नही और दिल हर एक शख्स मै प्यार खोजा करता है कहता है इस अमुक व्यक्ति के लिए रुक जा,

कोई कदम न उठा , थम जा की अभी सवेरा होने दे।।

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